तुम्हारी बहुत याद आती है

September 12, 2009
दीपक के लौ की तरह,
झिलमिलाती , टिमटिमाती
अंधेरी घनेरी रातों में
तुम्हारी बहुत याद आती है ।

ये कायनात सारी घुप्प अंधेरे में
चुप-सी रहती है,
केवल बैताल-सी साँय-2 कर हवा  चलती है  ,
कभी-कभी—–

मखमली-सी सेज पर ठंडी-बासी  सी,
मुर्दानगी छायी रहती है ।
इस तन्हाई में करवट बदलते-2
मेरी कमर मुझसे रुठ-सी गयी है ।

पहले कितना अच्छा लगता था
जब यही मेरी प्यारी कमर
नितांत एकांत में, तुम्हारी कमर से
अठखेलियाँ किया करती थी ।
हमारे- तुम्हारे उन्मुक्त तरंगों को
महकती सासों को एक करती थी ।

वही कमर अब बेगानी हो गयी है,
उसने थिरकना भी छोड. दिया है ,
अब मचलती भी नही,
खामोशी-से खिझकर
मेरी तन्हाई पर वह भी
मुँह फेर लेती है,
और मुझ पर हँसती है ।

कभी-2 मुझे लगता है
मेरी कमर ही मेरी फतह पर जश्न मनाएगी

सुबह को उठता हूँ तो
तुम्हारा रात में न होना
आर-पार तक चीर जाता है ।


यूं तो बालकनी कि खिडकी से झाकनें पर,
बाहर बहुत ही रेलम-पेल नजर आता है,
लोग भागते से नजर आते हैं ।
पर, तुम्हारे न होने से ,चारों तरफ,दर्द भरी तन्हाई का,
कुहासा दिन रात नजर आता है ।

सुबह से शाम यूं ही मायूसी में
बरसाती पानी की तरह उदास बित जाता है ।
फिर वही रात की नीरस खामोशी
काट खाने दौडती है–

सोचता हूँ इस तन्हाई में कुछ नज्म गाऊँ
पर, दिल रो-2 कर दर्द भरे नगमें
गुनगुनाने लगता है ।

कभी-2 सपने में बडबडाने लगता हूँ-
देखता हूँ,तुम्हे खिंच कर ले जा रहा है कोई
मुझसे दूर, बहुत दूर–
मैं हडबडाकर उठ बैठता हूँ,
तो फिर वही ठँडा बिस्तर
वही भयानक खामोशी ।

पहले तुम जब मिलती थी तो,
मेरी आँखें खुशी से बरस उठती थी
अब तो उनसे खुन टपकता है ।
मेरे अंतर में जो घाव है
वह जब बजबजाकर रिसने लगता है
तो,मेरा दिल चित्कार उठता है

मुझे मेरे दिल का रोना, कराहना
और धडकन का काँपना-थऱथऱाना
साफ सुनाई देता है ।
अब तक तो तुम्हारे इंतजार की परीक्षा में,
मैं पास होता रहा–
गर अब परीक्षा लोगी,
तो हार जाऊँगा …

मुझे इन तन्हाईयों  से कोई सारोकार  नहीं
अब तुम आ जाओ……
क्योंकि,तुम्हारी बहुत याद आती है !

Regards,
Holy~Devil

Funny but true things about GIRLFRIEND..

May 27, 2009

इस जंतु का नाम है “GirlFriend” . . . . . .

ये अक्सर “Boyfriend” के साथ पाई जाती है !

इनका पोस्टिक आहार “Boyfriend” का भेजा होता है !

इनको अक्सर नाराज होने का नाटक करते हुए देखा जा सकता है !
पर अगर पैसे खर्च किये जाये तो फीर नाटक ख़त्म हो जाता है…

इस प्राणी का सबसे खतरनाक हथियार रोना और इमोशनली ब्लैक मेल करना होता है !

गर्ल फ्रेंड से ब्रेक अप पर टेंशन नाम की बीमारी हो जाती है,
जिसका कोई इलाज नहीं..
ये ही एक ऐसा प्राणी है
जिसपे कोई विस्वास नहीं करता है…

गर्ल फ्रेंड के लिए बॉय फ्रेंड कुछ भी कर सकता है,
यहाँ तक की हस्ते हस्ते कुत्ता भी बनता है…

इस प्राणी में बहुत सारे अवगुण फीर भी ये प्राणी इतनी आसानी से नहीं मिलता है,
ये प्राणी भाव बहुत खाता है,

पर इस प्राणी के पास होता कुछ भी नहीं है
जो वास्तविक हो जिसपे भाव खाया जा सके…..
ये प्राणी नर प्राणी को बर्बाद करने में कोई भी कसर नहीं छोरता है…
ये प्राणी रुपया को आसानी से सूंघ सकता है     

Credit: My Inbox


तुम आई हो

August 16, 2008

“खिड़की का परदा हिलता है और लगता है तुम आई हो
जब जब दिल धड़कता है लगता है तुम्ही समायी हो

मेरी सांसो जी गर्मी में, गीतों में ,गजल, तरानो में
नयनों के उमंगो में या उनके घायल क्रंदन में
मेरी मदहोश तरंगों में, रग रग में तुम्ही समाई हो
मेरे ख्वाबो के सावन में तुम रिमझिम बनकर आई हो

नए शहर में जब मैं आया तुम बिन बहुत अकेला था
ख़ुद में मैं था लीं मगर तुम्हरी यादों का मेला था
हर चेहरे में तुमको ढूंढा,भीड़ में ख़ुद को तनहा पाया
एक झलक तुम्हरी मिल जाती, पल पल ताकता आस लगाया

पुरवा की बयार से पूछा, हर मौसम से हाल तुम्हारा
चाँदनी रातों से पूछा, पंछी से पूछा पता तुम्हारा
हर अनजाने चेहरे में तुम्हारी ही तलाश रही
सपनो में तुम आओगी, इतनी बाकी आस रही.

जब भी सुंदर नयनो से मेरी नयने टकराई
बलखाती अठखेलियों वाली,बस तुम ही तो याद आई

भीड़ में तनहा खड़ा हुआ एक मधुर संगीत सुना
मन यूँ चंचल हो बैठा,जैसे की तुमने गया हो

1st क्लास की खिड़की से महिला डब्बा को निहारता हूँ
टिकेट खिड़की की कतारों में पल पल तुमको ढूंढ़ता हूँ
एक दिन यु बस में बैठा,एक भीनी सुगंध हवा ने लायी
आँखे छल छल हो बैठी शायद तुम हो अब आई

internet पर जब भी बैठा तुम्हारा नाम ढूंढ़ता रहा
एक असीम बिश्वास से तुमको ही पूजता रहा
जब भी आँखे उनींदी होती, सपनो को बुलाता हूँ
सपनो में तुम आती हो, अद्भुत सुख में पता हूँ

हर दर्द में खुसी में बस तुमको ही मैं गाता हूँ
जीवन के हर अहसास में तुमको ही निभाता हूँ

इस जीवन का मोल न जानू तुम बिन बहुत अधुरा हूँ
तुम ही मेरा आदि -अंत हो तुमसे ही मैं पुरा हूँ “

(written on: 16 Aug 2008

Completed on: 16 Feb 2009)

Cheers

Holy-Devil