इश्क और समंदर की लहरें

इश्क और समंदर की लहरें
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इश्क और समंदर की लहरें,
एक समान असर करती हैं.
इनमें डूबने का मन करता है.
इनमें डूबने से डर लगता है.
लेकिन इनका प्रवाह तीव्र होता है.
तेजी से बहा लेता है अपने वेग से.
फिर कहाँ अपना अस्तित्व बच पता.
फिर तो ना होश काम आता है,
ना काम आता है सोच या तजुर्बा.
बस चुप चाप बहते जावो.
भूलकर खुद को असर सहते जावो.

यही सुख का चरम है.
डरो नहीं ये बस भरम है.
ये अल्लाह का करम है,
की तुम इश्क पाश में हो,
या हो लहर के आगोश में.

जीवन जीने का यही श्रेष्ठ उपाय है.
स्वर्ग सुख ही बस दूजा पर्याय है.

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Copyright @ Arun Bharti

One Response to इश्क और समंदर की लहरें

  1. ajay gautam says:

    sahi baat hai bhartiji ishq ke aavesh mein sabkuch bah jata hai. :)
    फिर तो ना होश काम आता है,
    ना काम आता है सोच या तजुर्बा
    mast likha hai sir :)

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